भोपाल Heat stroke: एमपी के भोपाल शहर में राजधानी में गर्मी लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है। 43 डिग्री पार तापमान के बीच हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और तेज बुखार के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। तेज और उमस के कारण शरीर शरीर का कूलिंग सिस्टम कल हो रहा है। मेडिसिन विशेषसस्टक अनुसार, अत्यधिक तापमान और उमस के कारण शरीर का थोरेगुलेटरी सिस्टम काम करना बंद कर देता है। . डॉअनिल शेजवार के अनुसार, इससे शरीर का तापमान 104 डिग्री फॉरेनहाइट से ऊपर पहुंच सकता है। ऐसे में दिमाग, किडनी, हृदय और नसों पर सीधा असर पड़ता है। अस्पतालों में गैस्ट्रोएन्टेराइटिस, डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट डिसबैलेंस, हीट एक्सॉशन और न्यूरोलॉजिकल लक्षणों वाले मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक लगातार गर्मी के कारण ब्रेन स्ट्रोक, कंफ्यूजन, दौरे और बेहोशी के मामले भी सामने आने लगे हैं। तीन दिन में अस्पताल में पहुंचे 22 हजार मरीज इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें तेज सिरदर्द, चक्कर, पसीना बंद होना, उल्टी, कमजोरी, सांस फूलना और अचानक बेहोशी हीट स्ट्रोक के बड़े संकेत हैं। डॉक्टरों ने कहा- ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। बचाव ही सबसे जरूरी विशेषज्ञों ने दोपहर की धूप से बचने, लगातार पानी पीने, हल्के सूती कपड़े पहनने और बच्चों-बुजुर्गों को सीधी धूप से दूर रखने की सलाह दी है। विशेषज्ञों की सलाह जीएमसी में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आयुष दुबे ने बताया कि हीट स्ट्रोक के साथ डिहाइड्रेशन और ब्रेन स्ट्रोक के मामले भी इस बार बढ़ रहे हैं। विशेषकर बुजुर्ग और पहले से बीमार मरीजों को अतिरिक्त सावधान रहें। गर्मी में शरीर से पानी और लवण तेजी से निकल जाता है। इस लिए लगातार तरल पदार्थ लेते रहें। चक्कर, तेज बुखार या बेहोशी आए तो तुरंत अस्पताल जाएं। जीएमसी से मांगे आंकड़े तेज गर्मी और हीट स्ट्रोक के बढ़ते मामलों के बीच गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के हमीदिया अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग को मरीजों का नियमित डेटा नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर नाराजगी जताते हुए कॉलेज प्रबंधन को पत्र भेजा है। इसमें हीट स्ट्रोक और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की दैनिक आंकड़े तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार जीएमसी प्रबंधन ने जवाब में कहा है कि कम्प्यूटर ऑपरेटर नहीं है। इसी लिए पोर्टल पर नियमित जानकारी अपलोड नहीं हो पा रही है। ज्यादा गंभीर हमीदिया में…. हमीदिया अस्पताल में प्रदेशभर से गंभीर मरीज पहुंचते हैं। यहां के आंकड़े महत्वपूर्ण होते है। स्वास्थ्य अधिकारियों को आशंका है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हीट स्ट्रोक के मामले वास्तविक संख्या से काफी कम हो सकते हैं। इससे वास्तविक स्थिति का आकलन प्रभावित हो रहा है। समय पर रिपोर्टिंग नहीं होने से राज्य स्तर पर हीट एक्शन प्लान की निगरानी प्रभावित हो रही है। इससे राहत और बचाव की रणनीति तय करने में भी दिक्कत आ सकती है

 
 
    IndiaTezNEWS24
    District: Hoshangabad
    State: Madhya Pradesh

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